कन्हैया जी 1974 के छात्र आन्दोलन के प्रखर सेनानी थे

18 शनिवार जे. पी. सेनानी कन्हैया (मड्डी), अधिवक्ता की शोक सभा का आयोजन सुबह 8 बजे, लोकनायक जयप्रकाश स्मारक स्थित मुक्त कला मंच पर किया गया. कन्हैया जी 1974 के छात्र आन्दोलन के प्रखर सेनानी थे. 1975 के आपातकाल के दौरान पूरे समय तक मीसाबंदी के रूप में वे आरा जेल में नजरबंद रहे थे. विगत लगभग 10 माह से वो कैंसर की बिमारी से पीड़ित थे और इलाजरत थे. विगत 14 मई को संध्या 4 बजे उनका निधन हो गया.

लोकनायक जयप्रकाश स्मारक संस्थान द्वारा आज प्रातः 8 बजे आयोजित शोक सभा की अध्यक्षता पूर्व विधायक रामाकांत ठाकुर ने तथा संचालन संस्थान के महा सचिव सुशील कुमार ने किया. शोक सभा में जे पी सेनानी और शहर के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में उपस्थित हुए.डा. नीरज सिंह ने कहा कि मेरी पहली जेल यात्रा 12 अप्रील 1974 को हुई थी, उस समय कन्हैया जी भी मेरे साथ गिरफ्तार हुए थे. कन्हैया जी अत्यंत मृदभाषी और मिलनसार व्यक्ति थे. सुशील तिवारी ने जे पी आन्दोलन में उनके साथ बिताये दिनों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी. नाथूराम ने कहा कि कन्हैया जी से मेरी मित्रता बालपन से थी और साथ -साथ ही आन्दोलन में शामिल रहे. सलिल भारतीय ने बताया कि कन्हैया जी किसी साथी से जब मिलते थे स्वागत करते थे और जाते समय काफी दूर तक उन्हें छोड़ने जाते थे.

अन्य वक्ताओं और श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में सर्वश्री गुलाबचंद प्रसाद, बैजनाथ यादव, बैजनाथ पासवान, अशोक मानव, राजेन्द्र मनियारा, अरूण श्रीवास्तव, राना प्रताप सिंह, प्रह्लाद सिंह, हाकिम प्रसाद, राजेन्द्र त्यागी, अनिल सिनहा, उमेश सिंह,अरूण प्रसाद, किशुन यादव, विश्वनाथ पांडे, सरदार गुरूचरण सिंह आदि प्रमुख रूप से शामिल थे.अपने अध्यक्षीय भाषण में पूर्व विधायक रामाकांत ठाकुर ने कहा कि हमलोग भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में शामिल हुए थे और आज भ्रष्टाचार उससे भी ज्यादा शिखर पर पहुंच गया है. कन्हैया जी एक मिलनसार और सहज मित्र थे, उनका जाना हम सब के लिये अपूर्णीय क्षति है.सभा के अंत में उपस्थित सभी साथियों ने दो मिनट मौन श्रद्धांजलि अर्पित की.उसके बाद कन्हैया जी अमर रहे नारा भी लगाया गया•सुशील कुमार,महासचिव,लोकनायक जयप्रकाश स्मारक संस्थान.