कहवा में रामजी के जन्म भयो हरि झुमरी,अवध में रामजी के जन्म भयो हरि झुमरी।”

राष्ट्रीय महिला परिषद माचा स्वामी महिला सेवा समिति द्वारा श्री सीताराम विवाह महोत्सव,महावीर स्थान रामना मैदान आरा। इस आयोजन के छठवां दिवस के प्रातः बेला में पूर्व आवाहित देवी देवताओं की पूजन वैदिक रीति रिवाज से आचार्य श्री ज्योति पाठक ने कराई। श्री रामचरित्र मानस पाठकर्ता श्री शशि भूषण जी महाराज ने पाठ में भरत जी जीवन पर कहा भरत भक्ति के प्रकाष्ठा के उस चोटी है जिसकी जीवन चरित्र को जीवन में उतारे जा तो जीवन में कभी भी किसी वस्तु की ईक्षा नहीं रह सकती।

भरत जी और श्रीराम जी के बीच अयोध्या जैसे राज्य सिंघासन को दो भाइयों के फुटबॉल की गेंद तरह हो गई दोनों भाई अपनी वचनों के पालन के लिए राज्य को परित्याग किया, एक जंगल में तो दूसरा अयोध्या के नदीग्राम में कुटिया बनाकर १४ वर्ष नियम पूर्वक साधना करते रहे,यही तक नहीं सभी अयोध्यावासी श्रीराम के लिए शुभमंगल कामना हेतु नियम संयम से रहना स्वीकारा। पाठ के बाद श्रीसीताराम विवाह में हल्दी कुटाई माताएं बहनों ने मांगलिक गीत ” कहवा में रामजी के जन्म भयो हरि झुमरी,अवध में रामजी के जन्म भयो हरि झुमरी।” हाथी साजों घोड़ा साजो रथ भगवान के। ” जनकपुर के सिया के लेके आवेली, होता आबरा जनकपुर जायक में। और” चल दोनों भाई धीरे_ धीरे, मिथिला नगरिया के पतली डगरी चालू ,राम दोनों भैया धीरे _ धीरे” ऊषा पाण्डेय,लीला सिंह,आशा देवी,सुनीता देवी,राधिका देवी,इंदु देवी,उर्मिला सिंह,मीणा देवी,बसंती देवी,पुष्पा सिन्हा,रंजू देवी और राधा शर्मा के गीत और नृत्य करते मंदिर प्रांगण भक्ति के माहौल को जनकपुर धाम बना दिया।वही दोपहर २.३० से ५.३० तक श्रीमद भागवत कथा व्यास श्री प्रेममूर्ति प्रदीप जी महाराज श्रीधाम वृन्दावन धाम से पधारे भागवत कथा में कहा कि ईश्वर ने अपनी वचनों और संतों के वचनों को पूरा करने हेतु मनुष्य रूप धारण करके इस धारा धाम पे आते है और सनातन धर्म की रक्षा करके इस धारा धाम से अपने साकेत,बैकुंठ को पधारते है, ईश्वर का जन्म हम सब गाते सुनते है पर प्रभु तो प्रगट होते है।भागवत कथा में बलि चरित्र से लेकर श्रीकृष्ण जन्म उत्सव में ” नन्द जी के आगन में बाजे आज बधाई” और आरती में उपस्थित नवल प्रसाद, रविशंकर तिवारी, जयप्रकाश तिवारी,मातादीन अग्रवाल,सोनू गुप्ता,उमेश तिवारीऔर अभिनाश चौरसिया तथा मंच संचालक डॉ श्री सत्यनारायण उपाध्याय आदि।
