जब बाण शैय्या पर भीष्म पितामह पड़े तब उनकी ध्यान में श्रीकृष्ण की हुई

राष्ट्रीय महिला परिषद माचा स्वामी महिला सेवा समिति द्वारा श्री सीताराम विवाह महोत्सव, महावीर स्थान रामना मैदान आरा में चल रही इस आयोजन तृतीय दिवस के प्रातः बेला में पूर्व आवाहित देवी देवताओं की पूजन वैदिक रीति रिवाज से आचार्य श्री ज्योति पाठक ने कराई,श्री रामचरित्र मानस पाठकर्ता श्री शशि भूषण जी महाराज ने पाठ में कहा कि प्रभु की जन्म उत्सव जब भी गाई जाए या उनकी विवाह उत्सव की व्याख्यान करने या सुननेवाले से जीवन में मंगलमय कार्य होती हैं, मानस में श्री तुलसीदास जी ने कहा कि “श्रीराम विवाह प्रेम सहित गवाही सुनही” वही दोपहर २.३० से श्रीधाम वृन्दावन धाम से पधारे भागवत कथा में व्यास श्री प्रेममूर्ति प्रदीप जी महाराज ने कथा में कहा कि जब बाण शैय्या पर भीष्म पितामह पड़े तब उनकी ध्यान में श्रीकृष्ण की हुई ,उधर राज्य सिंघासन पर हस्तिनापुर युधिष्ठिर विराजमान हुए तो श्रीकृष्ण के साथ पाण्डव पुत्र मिलने गए बाण शैय्या से भीसमाचार्य ने सोय ही श्रीकृष्ण जी का अभिनंदन किया , अंतिम दर्शन प्राप्त किया और कहा कि मैं अपनी जीवन के पूर्ण स्मरण है कि कोइ १०० जन्म तक पाप ऐसा न किया जो बाण शैय्या पर आज विराजमान हु, तब श्रीकृष्ण ने १०१ जन्म पर दृष्टांत दिया कि एक सर्प को आप बचाने के लिए बाण से अलग किया था वह सीज के काटो पर २८ दिन पड़ा रहा,उसी समय श्राप दिया हे राजन आप मुझे प्राण दंड दे देते पर ऐसे मुझे घुट _ घुट कर प्राण गया से इसका दंड आपको भी मिले। यानी हम जो भी करते है या जो आज दुख या सुख मिला यह सब अपनी पूर्व जन्म की है सो हर प्राणी को यह चाहिए कि अपनी कर्म को सही सन्मार्ग पर लाए। व्यास पीठ की पूजन ऊषा पाण्डेय, लालती सिंह, लीला सिंह,उर्मिला सिन्हा, सुनीता सिंह, पुष्पा सिन्हा, राधा शर्मा, प्रतिमा मधुकर, उर्मिला सिंह, वीणा सिन्हा, रेखा सिंहा,विभा अग्रवाल,मीरा गुप्ता, रविशंकर तिवारी, महेन्द्र यादव और मंच संचालक डॉ श्री सत्यनारायण उपाध्याय जी ने किया
