राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 77वीं पूण्यतिथी के अवसर पर शहादत दिवस और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

लोकनायक जयप्रकाश स्मारक संस्थान
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 77वीं पूण्यतिथी के अवसर पर शहादत दिवस और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन लोकनायक जयप्रकाश स्मारक के मुक्त कला मंच पर किया गया. श्रद्धांजलि सभा का आयोजन लोकनायक जयप्रकाश स्मारक संस्थान, सर्वोदय मंडल एवं इप्टा के के संयुक्त तत्वावधान में हुआ. 11 बजे उपस्थित गणमान्य लोगों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा 2 मिनट की मौन श्रद्धांजलि दी गयी. तत्पश्चात महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गयी. नागेन्द्र पाण्डेय सहित इप्टा के कलाकारों द्वारा महात्मा गांधी के दो प्रिय भजनों, “रघुपति राघव राजाराम” और ” वैष्णव जन तो तेने कहिये” को प्रस्तुत किया गया.

श्रद्धांजलि सभा और भजनों की प्रस्तुति के बाद एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. विचार गोष्ठी का विषय था ” महात्मा गांधी और लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण”. गोष्ठी के प्रारंभ में सुशील कुमार द्वारा लिखित एक पर्चा संचालक रामनाथ ठाकुर द्वारा पढ़ा गया. इस पर्चे में महात्मा गांधी के बारे में फैलाये गये झूठे और अपमान जनक आरोपों का बिन्दुवार खंडन किया गया है.
” गांधी जी ने देश का बंटवारा कराया, भगत सिंह की फांसी रुकवाने का प्रयास गांधी जी ने नहीं किया, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को कांग्रेस अध्यक्ष पद से स्तीफा देने के लिये मजबूर किया, गांधी जी मुसलमानों के पक्षधर और हिन्दू विरोधी थे, गांधी आम्बेडकर समझौते पर आक्षेप” जैसे आनरगल आरोपों का इस परचे में ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर बिंदुवार खंडन किया गया है.
विषय प्रवेश करते हुए सुशील कुमार ने कहा की आजादी के आन्दोलन के पूर्व हमारे देश और समाज को आधुनिक लोकतंत्र का अभ्यास नहीं था. आजादी के आन्दोलन के संघर्ष में देश का लोकतांत्रिक प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ और भारतीय संविधान के आधार पर लोकतांत्रिक राष्ट्र के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई जो अभी जारी है. परंतु विगत एक दशक से संविधान को नकारते हुए राष्ट्र निर्माण की दिशा को विपरीत दिशा में ले जाने का कुत्सित प्रयास हो रहा है, जिसका महात्मा गांधी के आदर्शों के आधार पर मुकाबला करना हमारे समाज के लिये एक चुनौती है.
अपने उद्बोधन ने में वरिष्ठ साहित्यकार डा. नीरज सिंह ने कहा कि लोकतंत्र के मूल्यों और आदर्शों को अपने आचरण और में व्यवहार से लाकर ही लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण की दिशा में बढ़ा जा सकता है. वरिष्ठ राजनीतिक कार्यकर्ता सुशील तिवारी ने कि बहुसंख्यक जमात के समुचित प्रतिनिधित्व के आधार पर ही लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण संभव है, जिसका महात्मा गांधी ने हमें दिखाया है. वरिष्ठ साहित्यकार, कवि एवं आलोचक जी केन्द्र कुमार ने कहा कि अहिंसा और सत्याग्रह के रास्ते गांधी ने लोकतांत्रिक मूल्यों को जीते हुए देश को दिशा दिया जो समतामूलक, सहिष्णु और सर्वसमावेशी था. वयस्क मताधिकार आजादी मिलते ही सभी नागरिकों को संविधान के द्वारा प्राप्त हुआ, जिसमें महात्मा गांधी के अहिंसक लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता और नेहरू जी एवं बाबा साहब अंबेडकर का अहम योगदान था. प्रो. बलराज ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र को भीड़ तंत्र और साम्प्रदायिक उन्माद में बदलने का आज कुत्सित प्रयास हो रहा है, जिससे समाज को सतर्क करना हमारी जिम्मेवारी है. कवि जगतनंदन सहाय ने हरिवंश राय बच्चन द्वारा लिखित कविता का पाठ करते हुए राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित की.
संचालक सर्वोदय मंडल के जिलाध्यक्ष एवं गांधीवादी कार्यकर्ता रामनाथ ठाकुर ने कहा कि गांधी के विचारों और आदर्शों को आज के समाज में और विशेषकर यूवावों लें जान जरूरी है. इसके लिये गांधी को मानने वालों को संयुक्त प्रयास करने की जरूरत है.
धन्यवाद ज्ञापित करते हुए वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अशोक मानव ने कहा कि साम्प्रदायिक और उन्मादी राजनीति के विरोध में जनजागृति अभियान चलाना हमारे लिये एक चुनौती है. इसके लिये हमें नयी पीढ़ी को तैयार करना होगा.
इस अवसर पर अशोक मानव, हरेन्द्र कुमार बिहारी, वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्र, मो सरफराज अहमद, इप्टा कलाकार अल्का शरण, अम्बे शरण,अतुल प्रकाश अधिवक्ता आलोक कुमार दीपक, नन्दकिशोर सिंह,आनंदमोहन सिन्हा, रामाकांत ठाकुर, प्रमोद कुमार राय, श्रीराम यादव,बबन यादव आदि वक्ताओं ने भी श्रद्धांजलि स्वरुप अपने विचार रखे.

