
राष्ट्रीय महिला परिषद माचा स्वामी महिला सेवा समिति द्वारा श्री सीताराम विवाह महोत्सव,महावीर मंदिर रामना मैदान, आरा में चल रही इस आयोजन के सातवां दिवस प्रातः पूर्व आवाहित देवी देवताओं की पूजन वैदिक रीति रिवाज से आचार्य श्री ज्योति पाठक ने कराई। श्री रामचरित्र मानस पाठकर्ता श्री शशि भूषण जी महाराज में कहा कि ईश्वर जो सारी दुनिया को नचाते है पर जब सीता जी ने स्वर्ण मृग को देखा तो प्रभु से उसे लाने के लिए कहा, नर लीला करने लगे तो माया के मृग के पीछा करने लगे यह जानते हुए भी कि यह राक्षस है पर वे उधार करने के लिए उस लीला किया और उसे एक ही बाण से मुक्त किया जो वह मारीच राक्षस बना था वह पूर्व जन्म में गंधर्व था ऋषि के श्राप से वह तन पाया था,

पाठ के बाद श्रीसीताराम विवाह हेतु माटिकोड हुईं जिसमें मांगलिक गीत “कहवा के पियर माटी कहवा के कुदार हे,कहवा के पांच सुहागिन माटीकोड़े जात हे।जनकपुर के पियर माटी अयोध्या के कुदार हे,आरा के पांच सुहागिन माटी कोड़े जय हे” जिसमें मुख्यरूप से लालती सिंह, लीला सिंह, उषा पांडेय, पुष्पा सिन्हा,रोजी सिंह,उर्मिला सिंह, राधिका देवी, राधा शर्मा, प्रतिमा मधुकर,सुनीता देवी, आशा देवी, इन्दु सिंह, जया देवी,अर्चना सिंह और संतोषी पाण्डेय इत्यादि सैकड़ों माता बहन वही दोपहर २.३० से ५.३० साम तक

श्रीमद भागवत कथा व्यास श्री प्रेममूर्ति प्रदीप जी महाराज श्रीधाम वृन्दावन धाम से पधारे भागवत कथा में कहा कि भगवान का प्रकट होते है वह तो हमारे आपके हृदय में बैठा पर हम जैसा चाहे उन्हें अपने समय अनुसार प्रकट करते है, सो श्रीरामचरिच मानस में श्री तुलसी दास लिखा कि ” ईश्वर सर्वत्र सामना,प्रेम से प्रकट हुई मै जाना” और ” मोही कपट छल छिद्र न भावा,निर्मल मन जन सो मोहि पावा” संसार के जितने मनुष्य है अपनी कर्तव्य को सही से पालन करने से जीवन में शांति मिलती है श्रीमद भागवत जी की आरती जयप्रकाश तिवारी, रविशंकर तिवारी,राजकिशोर सिंह,विजय सिंह और भागवत कथा में प्रसाद का वितरण डॉ कन्हैया सिंह जी के तरफ से हुई, मंच संचालक डॉ श्री सत्यनारायण उपाध्याय जी ने किया।
